Tuesday, September 18, 2012

Up in the lonesome mountains there was this shanty tea stall. Rain, fire, old kettle. And two wooden stools...still robust. Rain drops dripping in. And Chai in some cheap paper-cups. :)

काश ऐसा होता के तू
मेरी इन् अँखियो को
पढ़ पाता.

कहने को तो कुछ भी नही है
सिवा दो चार बून्दो के.

तू ढूंड तो ज़रा...
और कुछ भी नही है.

सिर्फ़ तेरे
सिवा तेरे.